अयोध्या फैसले पर स्वरा भास्कर ने याद की अपनी प्रतिक्रिया, बताया– मुस्लिम दोस्तों को किया था मैसेज अभिनेत्री स्वरा भास्कर एक बार फिर अपने पुराने बयान को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में उन्होंने एक पॉडकास्ट में 2019 के अयोध्या मामले पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अपनी तत्कालीन प्रतिक्रिया के बारे में बात की। स्वरा ने बताया कि उस समय वह फैसले से काफी परेशान थीं और उन्होंने अपनी फोनबुक में मौजूद कई मुस्लिम दोस्तों को मैसेज किया था। स्वरा ने The Midnight Hour पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान उस दौर को याद किया। उनके मुताबिक, 9 नवंबर 2019 को राम जन्मभूमि–बाबरी मस्जिद मामले में फैसला आने के बाद उनकी भावनाएं काफी तीखी थीं। उन्होंने कहा कि उन्हें फैसला अनुचित लगा और इसी भावना के बीच उन्होंने अपने मुस्लिम परिचितों से संपर्क किया। आमिर, सलमान और शाहरुख को भी किया था मैसेज स्वरा ने बताया कि उन्होंने अपनी फोनबुक में मौजूद कई मुस्लिम लोगों को संदेश भेजे थे। इनमें अभिनेता आमिर खान, सलमान खान और शाहरुख खान के अलावा फहाद अहमद का नाम भी उन्होंने लिया। अभिनेत्री के अनुसार, उन्होंने अपने संदेश में एक हिंदू के तौर पर फैसले को लेकर दुख और शर्मिंदगी जताई थी। उन्होंने यह भी बताया कि उस समय जो कुछ महसूस कर रही थीं, वह उन्होंने अपने संदेशों के जरिए अपने दोस्तों के साथ साझा किया। क्या था 2019 का अयोध्या फैसला? 9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या भूमि विवाद पर अपना फैसला सुनाया था। अदालत ने विवादित भूमि पर राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट के गठन का रास्ता साफ किया था। साथ ही, सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को मस्जिद निर्माण के लिए अयोध्या में पांच एकड़ उपयुक्त जमीन देने का निर्देश दिया गया था। यह फैसला लंबे समय से चले आ रहे विवाद में एक महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम था। सोशल मीडिया पर भी आई प्रतिक्रियाएं स्वरा के पुराने बयान का जिक्र सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर अलग–अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ यूजर्स ने उनकी राय की आलोचना की, जबकि कुछ पोस्ट में उनके बयान को लेकर व्यक्तिगत टिप्पणियां भी की गईं। हालांकि, सोशल मीडिया पर सामने आने वाली प्रतिक्रियाओं को अलग–अलग यूजर्स की राय के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। वायरल पोस्ट या टिप्पणियों की स्वतंत्र पुष्टि हर मामले में संभव नहीं होती। फिलहाल चर्चा बयान को लेकर है स्वरा भास्कर की यह टिप्पणी 2019 के फैसले के बाद उनकी निजी प्रतिक्रिया से जुड़ी है। उनके बयान और सोशल मीडिया पर सामने आई प्रतिक्रियाओं के बीच अंतर रखना जरूरी है। अदालत के फैसले के तथ्य अलग विषय हैं, जबकि किसी व्यक्ति की उस फैसले को लेकर व्यक्तिगत राय अलग विषय है। नोट: इस लेख में सोशल मीडिया पर किए गए दावों को तथ्य के रूप में पेश नहीं किया गया है। जहां आधिकारिक या स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है, वहां उसे स्पष्ट रूप से अलग रखा गया है।

